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सपना एक साया?

 कल ही तो देखा था,

आज बुझा -सा होने आया है,

पर मैंने तो सोचा था —

सपना एक साया है…


मैं चलूँगी, वो चलेगा,

मैं बढ़ूँगी, वो बढ़ेगा,

जिसे तो अभी खिलना था,

वो आज थम-सा होने आया है,

पर मैंने तो सोचा था —

सपना एक साया है…


आँखें वही तेज़ हैं,

पर सपने आज नम हैं,

एक समय था—

जब इसका कद आसमान छूता था,

आज वही कद घटके

कम-सा होने आया है,

पर मैंने तो सोचा था —

सपना एक साया है…


अब जाना ये सच है,

सपनों की भी एक उम्र होती है,

जो कल तक लम्बी परछाई था,

आज वही सिमट-सा होने आया है,

जिसे मैं उम्रभर का साथी मानती थी,

वो भी चुपचाप कहीं खोने आया है,

पर मैंने तो हमेशा सोचा था—

सपना एक साया है…


-रिया बेलवाल

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