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The Weight of Welcome

 

Slowly walking in my room,

Wondering how I’ll find my way out—

For the gates that once welcomed me

Have now been firmly shut.


Slowly walking in my room,

Wondering if I should cut the ties,

For the gates that once invited me

Were nothing but heavy lies.


Slowly walking in my room,

Feeling like I want to ruin his elegant face,

For the gates that once invited me

Spoke in filtered grace.


Slowly walking in my room,

Breaking the silence, breaking the curse,

For the gates that once invited me

Are etched in my memory, deep and fierce.


-Riya Belwal




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सपना एक साया?

 कल ही तो देखा था, आज बुझा -सा होने आया है, पर मैंने तो सोचा था — सपना एक साया है… मैं चलूँगी, वो चलेगा, मैं बढ़ूँगी, वो बढ़ेगा, जिसे तो अभी खिलना था, वो आज थम-सा होने आया है, पर मैंने तो सोचा था — सपना एक साया है… आँखें वही तेज़ हैं, पर सपने आज नम हैं, एक समय था— जब इसका कद आसमान छूता था, आज वही कद घटके कम-सा होने आया है, पर मैंने तो सोचा था — सपना एक साया है… अब जाना ये सच है, सपनों की भी एक उम्र होती है, जो कल तक लम्बी परछाई था, आज वही सिमट-सा होने आया है, जिसे मैं उम्रभर का साथी मानती थी, वो भी चुपचाप कहीं खोने आया है, पर मैंने तो हमेशा सोचा था— सपना एक साया है… -रिया बेलवाल

नूर

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